Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2041 पारण समय 05:34–06:52, शुक्र 20 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2041 कब है?
गुरुवार 19 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 19 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 20 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
- गुरुवार 19 दिसंबर
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05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 20 दिसंबर
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05:34–06:52पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में सफला एकादशी गुरु 19 दिसंबर को क्यों है?
सफला एकादशी गुरु 19 दिसंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 04:30 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:30 से 06:02 गुरु तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:30 बुध से 06:02 तक।
द्वादशी: 06:02 गुरु से 06:52 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 18 दिसंबर को 05:33 और गुरु 19 दिसंबर को 05:34। एकादशी (बुध 18 दिसंबर 04:30 से गुरु 19 दिसंबर 06:02 तक) और द्वादशी (गुरु 19 दिसंबर 06:02 से शुक्र 20 दिसंबर 06:52 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 19 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 18 दिसंबर को दशमी 04:30 तक है, उसके भीतर (03:57–05:33); गुरु 19 दिसंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 20 दिसंबर, 05:34–06:52
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 19 दिसंबर 06:02 से शुक्र 20 दिसंबर 06:52 तक है; हरिवासर 12:14 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 20 दिसंबर को सूर्योदय (05:34) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।