Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2040 2040 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2040 कब है?
2040 में दो बार
मंगलवार 10 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 10 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 29 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 29 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 11 जनवरी
रविवार 30 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 10 जनवरी
-
05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 11 जनवरी
-
05:47–11:05पारण समयव्रत खोलने का समय
शनि 29 दिसंबर
-
05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 30 दिसंबर
-
08:07–18:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 10 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 10 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:35 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:35 सोम से 14:05 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 10 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:46: मंगल 10 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:35 सोम पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 11 जनवरी, 05:47–11:05
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 10 जनवरी 14:05 से बुध 11 जनवरी 11:05 तक है; हरिवासर 19:20 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 11 जनवरी को सूर्योदय (05:47) से होता है।
शनि 29 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 29 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:25 से 02:33 रवि तक।
एकादशी 02:33 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:25 शनि से 02:33 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 29 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:39: शनि 29 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:25 पर, उससे (04:03–05:39) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 30 दिसंबर, 08:07–18:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 30 दिसंबर 02:33 से सोम 31 दिसंबर 00:52 तक है; हरिवासर 08:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।