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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में सफला एकादशी 2017 पारण समय 08:21⁠–⁠17:33, गुरु 14 दिसंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में सफला एकादशी 2017 कब है?

बुधवार 13 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में बुध 13 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 14 दिसंबर

पारण समय
08:21–17:33
9 घं 12 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 13 दिसंबर
  • 08:14व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 14 दिसंबर
  • 08:21–17:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में सफला एकादशी बुध 13 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी बुध 13 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:38 से 01:55 गुरु तक।

एकादशी 01:55 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 13 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 08:14: बुध 13 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:38 पर, उससे (06:38–08:14) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 14 दिसंबर, 08:21–17:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 14 दिसंबर 01:55 से शुक्र 15 दिसंबर 03:38 तक है; हरिवासर 08:21 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:07 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।