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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2013 2013 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 2013 कब है?

2013 में दो बार

मंगलवार 8 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 8 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 28 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 28 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 9 जनवरी

पारण समय
06:46–19:53
13 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

रविवार 29 दिसंबर

पारण समय
06:39–19:28
12 घं 49 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

मंगल 8 जनवरी

  • 06:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 9 जनवरी
  • 06:46–19:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

शनि 28 दिसंबर

  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 29 दिसंबर
  • 06:39–19:28पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

मंगल 8 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी मंगल 8 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:31 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:31 सोम से 06:51 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 8 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:45: मंगल 8 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:31 सोम पर, उससे (05:09–06:45) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 9 जनवरी, 06:46–19:53 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 9 जनवरी को 03:49 पर, रात में, अरुणोदय (05:10) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:46) से सूर्यास्त (19:53) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

शनि 28 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 28 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:25 शुक्र से 21:49 तक।

एकादशी 21:49 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 28 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:38: शनि 28 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:25 शुक्र पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 29 दिसंबर, 06:39–19:28

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 28 दिसंबर 21:49 से रवि 29 दिसंबर 19:28 तक है; हरिवासर 03:14 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 29 दिसंबर को सूर्योदय (06:39) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:17 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।