Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2011 मंगल 20 दिसंबर या बुध 21 दिसंबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 2011 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 20 दिसंबर
वैष्णव
बुधवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 20 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 21 दिसंबर
वैष्णव · गुरुवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 20 दिसंबर
-
06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 21 दिसंबर
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07:58–19:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 21 दिसंबर
-
06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 22 दिसंबर
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06:35–19:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में सफला एकादशी मंगल 20 दिसंबर या बुध 21 दिसंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी मंगल 20 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 21 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:17 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:17 से 02:39 बुध तक।
एकादशी 02:39 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:17 मंगल से 02:39 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 20 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:34: मंगल 20 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 20 दिसंबर को दशमी 05:17 तक है, अरुणोदय (04:58–06:34) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:39 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 21 दिसंबर को व्रत रखते हैं: बुध 21 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 21 दिसंबर, 07:58–19:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 21 दिसंबर 02:39 से बुध 21 दिसंबर 23:55 तक है; हरिवासर 07:58 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:13 तक, करते हैं।
वैष्णव · गुरु 22 दिसंबर, 06:35–19:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 22 दिसंबर को 23:55 बुध पर, रात में, अरुणोदय (04:59) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:35) से सूर्यास्त (19:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।