Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1989 1989 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 1989 कब है?
1989 में दो बार
मंगलवार 3 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 3 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 23 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 23 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 4 जनवरी
रविवार 24 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 3 जनवरी
-
06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 4 जनवरी
-
06:43–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
शनि 23 दिसंबर
-
06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 24 दिसंबर
-
06:36–19:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 3 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 3 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:00 सोम से 20:53 तक।
एकादशी 20:53 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 3 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:42: मंगल 3 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:00 सोम पर, उससे (05:06–06:42) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 4 जनवरी, 06:43–19:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 3 जनवरी 20:53 से बुध 4 जनवरी 21:00 तक है; हरिवासर 02:55 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 4 जनवरी को सूर्योदय (06:43) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:21 तक, करते हैं।
शनि 23 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:05 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:05 शुक्र से 18:36 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:36: शनि 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:05 शुक्र पर, उससे (05:00–06:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 24 दिसंबर, 06:36–19:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 23 दिसंबर 18:36 से रवि 24 दिसंबर 20:53 तक है; हरिवासर 01:11 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 24 दिसंबर को सूर्योदय (06:36) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:15 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।