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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1986 1986 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 1986 कब है?

1986 में दो बार

सोमवार 6 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 6 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 27 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 27 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 7 जनवरी

पारण समय
06:44–19:14
12 घं 30 मि

रविवार 28 दिसंबर

पारण समय
06:38–12:12
5 घं 34 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

सोम 6 जनवरी

  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 7 जनवरी
  • 06:44–19:14पारण समयव्रत खोलने का समय

शनि 27 दिसंबर

  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 28 दिसंबर
  • 06:38–12:12पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

सोम 6 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी सोम 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:46 से 22:07 तक।

एकादशी 22:07 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:44: सोम 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:46 पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 7 जनवरी, 06:44–19:14

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 6 जनवरी 22:07 से मंगल 7 जनवरी 19:14 तक है; हरिवासर 03:24 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 7 जनवरी को सूर्योदय (06:44) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:22 तक, करते हैं।

शनि 27 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:14 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:14 शुक्र से 15:03 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:38: शनि 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:14 शुक्र पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 28 दिसंबर, 06:38–12:12

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 27 दिसंबर 15:03 से रवि 28 दिसंबर 12:12 तक है; हरिवासर 20:20 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 28 दिसंबर को सूर्योदय (06:38) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।