Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1979 पारण समय 05:32–07:08, रवि 16 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1979 कब है?
शनिवार 15 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 15 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 16 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 15 दिसंबर
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05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 16 दिसंबर
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05:32–07:08पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में सफला एकादशी शनि 15 दिसंबर को क्यों है?
सफला एकादशी शनि 15 दिसंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 04:56 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:56 से 06:23 शनि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:56 शुक्र से 06:23 तक।
द्वादशी: 06:23 शनि से 07:08 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 14 दिसंबर को 05:31 और शनि 15 दिसंबर को 05:32। एकादशी (शुक्र 14 दिसंबर 04:56 से शनि 15 दिसंबर 06:23 तक) और द्वादशी (शनि 15 दिसंबर 06:23 से रवि 16 दिसंबर 07:08 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 15 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 14 दिसंबर को दशमी 04:56 तक है, उसके भीतर (03:55–05:31); शनि 15 दिसंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 16 दिसंबर, 05:32–07:08
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 15 दिसंबर 06:23 से रवि 16 दिसंबर 07:08 तक है; हरिवासर 12:35 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 16 दिसंबर को सूर्योदय (05:32) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।