Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1978 1978 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1978 कब है?
1978 में दो बार
गुरुवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 5 जनवरी का पूरा पंचांगस्मार्त
सोमवार 25 दिसंबर
वैष्णव
मंगलवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 25 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 6 जनवरी
स्मार्त · मंगलवार 26 दिसंबर
वैष्णव · बुधवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 5 जनवरी
-
05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 6 जनवरी
-
05:44–12:08पारण समयव्रत खोलने का समय
सोम 25 दिसंबर
स्मार्त
- सोमवार 25 दिसंबर
-
05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 26 दिसंबर
-
08:51–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 26 दिसंबर
-
05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 27 दिसंबर
-
05:38–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:48 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:48 बुध से 15:15 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: गुरु 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:48 बुध पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 6 जनवरी, 05:44–12:08
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 5 जनवरी 15:15 से शुक्र 6 जनवरी 12:08 तक है; हरिवासर 20:28 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 6 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है।
सोम 25 दिसंबर और मंगल 26 दिसंबर क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी सोम 25 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 26 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:13 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:13 से 03:18 मंगल तक।
एकादशी 03:18 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:13 सोम से 03:18 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 25 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: सोम 25 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 25 दिसंबर को दशमी 04:13 तक है, अरुणोदय (04:01–05:37) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:18 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 26 दिसंबर को व्रत रखते हैं: मंगल 26 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 26 दिसंबर, 08:51–18:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 दिसंबर 03:18 से बुध 27 दिसंबर 01:32 तक है; हरिवासर 08:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 27 दिसंबर, 05:38–18:49 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 27 दिसंबर को 01:32 पर, रात में, अरुणोदय (04:02) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:38) से सूर्यास्त (18:49) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।