tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1973 पारण समय 09:51⁠–⁠18:46, गुरु 20 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1973 कब है?

बुधवार 19 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 19 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 20 दिसंबर

पारण समय
09:51–18:46
8 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 19 दिसंबर
  • 05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 20 दिसंबर
  • 09:51–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी बुध 19 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी बुध 19 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:19 से 03:26 गुरु तक।

एकादशी 03:26 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:19 बुध से 03:26 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 19 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:34: बुध 19 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:19 पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 20 दिसंबर, 09:51–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 20 दिसंबर 03:26 से शुक्र 21 दिसंबर 05:05 तक है; हरिवासर 09:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:12 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।