tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1972 पारण समय 09:35⁠–⁠18:51, रवि 31 दिसंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1972 कब है?

शनिवार 30 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 30 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 31 दिसंबर

पारण समय
09:35–18:51
9 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 30 दिसंबर
  • 05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 31 दिसंबर
  • 09:35–18:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में सफला एकादशी शनि 30 दिसंबर को क्यों है?

सफला एकादशी शनि 30 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:20 से 02:55 रवि तक।

एकादशी 02:55 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:20 शनि से 02:55 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 30 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:40: शनि 30 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:20 पर, उससे (04:04–05:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 31 दिसंबर, 09:35–18:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 31 दिसंबर 02:55 से सोम 1 जनवरी 05:36 तक है; हरिवासर 09:35 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।