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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1943 1943 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1943 कब है?

1943 में दो बार

शनिवार 2 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 2 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 23 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 23 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 3 जनवरी

पारण समय
05:42–18:52
13 घं 9 मि · Tithika की परिपाटी

शुक्रवार 24 दिसंबर

पारण समय
05:36–07:16
1 घं 40 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शनि 2 जनवरी

  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 3 जनवरी
  • 05:42–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

गुरु 23 दिसंबर

  • 05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 24 दिसंबर
  • 05:36–07:16पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शनि 2 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शनि 2 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:36 से 23:23 तक।

एकादशी 23:23 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 2 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: शनि 2 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:36 पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 3 जनवरी, 05:42–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 2 जनवरी 23:23 से रवि 3 जनवरी 20:31 तक है; हरिवासर 04:40 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 3 जनवरी को सूर्योदय (05:42) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं।

गुरु 23 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:16 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:16 बुध से 08:10 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: गुरु 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:16 बुध पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 24 दिसंबर, 05:36–07:16

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 23 दिसंबर 08:10 से शुक्र 24 दिसंबर 07:16 तक है; हरिवासर 13:57 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 24 दिसंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।