Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1937 1937 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1937 कब है?
1937 में दो बार
शुक्रवार 8 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 8 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 27 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 27 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शनिवार 9 जनवरी
मंगलवार 28 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शुक्र 8 जनवरी
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05:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 9 जनवरी
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05:46–10:26पारण समयव्रत खोलने का समय
सोम 27 दिसंबर
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05:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 28 दिसंबर
-
11:53–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शुक्र 8 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 8 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:46 से। एकादशी: 05:46 से 08:16 शुक्र तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:46 गुरु से 08:16 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 8 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:45: शुक्र 8 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 05:46 गुरु पर, उससे (04:09–05:45) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 9 जनवरी, 05:46–10:26
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 8 जनवरी 08:16 से शनि 9 जनवरी 10:26 तक है; हरिवासर 14:49 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 9 जनवरी को सूर्योदय (05:46) से होता है।
सोम 27 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:49 से 05:13 मंगल तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:13 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 02:49 सोम से 05:13 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:38: सोम 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:49 पर, उससे (04:02–05:38) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 28 दिसंबर, 11:53–18:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 28 दिसंबर 05:13 से बुध 29 दिसंबर 07:53 तक है; हरिवासर 11:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।