tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1913 1913 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1913 कब है?

1913 में दो बार

गुरुवार 2 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 2 जनवरी का पूरा पंचांग

मंगलवार 23 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 23 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 3 जनवरी

पारण समय
09:29–18:52
9 घं 23 मि · Tithika की परिपाटी

बुधवार 24 दिसंबर

पारण समय
05:36–16:19
10 घं 43 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

गुरु 2 जनवरी

  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 3 जनवरी
  • 09:29–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

मंगल 23 दिसंबर

  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 24 दिसंबर
  • 05:36–16:19पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

गुरु 2 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी गुरु 2 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:12 से 03:15 शुक्र तक।

एकादशी 03:15 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:12 गुरु से 03:15 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:35: गुरु 2 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:12 पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 3 जनवरी, 09:29–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 जनवरी 03:15 से शनि 4 जनवरी 03:43 तक है; हरिवासर 09:22 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

मंगल 23 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी मंगल 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:09 सोम से 18:08 तक।

एकादशी 18:08 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: मंगल 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:09 सोम पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 24 दिसंबर, 05:36–16:19

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 23 दिसंबर 18:08 से बुध 24 दिसंबर 16:12 तक है; हरिवासर 23:39 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 24 दिसंबर को सूर्योदय (05:30) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:08 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।