Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 2016 पारण समय 06:36–08:45, गुरु 27 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में रमा एकादशी 2016 कब है?
बुधवार 26 अक्टूबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 26 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 27 अक्टूबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- बुधवार 26 अक्टूबर
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06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 27 अक्टूबर
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06:36–08:45पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में रमा एकादशी बुध 26 अक्टूबर को क्यों है?
रमा एकादशी बुध 26 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:43 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 से 07:00 बुध तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 मंगल से 07:00 तक।
द्वादशी: 07:00 बुध से 08:45 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 25 अक्टूबर को 06:37 और बुध 26 अक्टूबर को 06:36। एकादशी (मंगल 25 अक्टूबर 05:43 से बुध 26 अक्टूबर 07:00 तक) और द्वादशी (बुध 26 अक्टूबर 07:00 से गुरु 27 अक्टूबर 08:45 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 26 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 25 अक्टूबर को दशमी 05:43 तक है, उसके भीतर (05:01–06:37); बुध 26 अक्टूबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 27 अक्टूबर, 06:36–08:45
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 26 अक्टूबर 07:00 से गुरु 27 अक्टूबर 08:45 तक है; हरिवासर 13:26 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 27 अक्टूबर को सूर्योदय (06:36) से होता है।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।