tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 2011 पारण समय 06:38⁠–⁠19:15, सोम 24 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में रमा एकादशी 2011 कब है?

रविवार 23 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 23 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 24 अक्टूबर

पारण समय
06:38–19:15
12 घं 37 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 23 अक्टूबर
  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 24 अक्टूबर
  • 06:38–19:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी रवि 23 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी रवि 23 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:34 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:34 शनि से 08:06 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 23 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:38: रवि 23 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:34 शनि पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 24 अक्टूबर, 06:38–19:15 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 24 अक्टूबर को 05:02 पर, रात में, अरुणोदय (05:02) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:38) से सूर्यास्त (19:15) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।