tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1996 पारण समय 07:56⁠–⁠19:21, गुरु 7 नवंबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में रमा एकादशी 1996 कब है?

बुधवार 6 नवंबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 6 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 7 नवंबर

पारण समय
07:56–19:21
11 घं 25 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 6 नवंबर
  • 06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 7 नवंबर
  • 07:56–19:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी बुध 6 नवंबर को क्यों है?

रमा एकादशी बुध 6 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:53 मंगल से 01:39 गुरु तक।

एकादशी 01:39 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 6 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:31: बुध 6 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:53 मंगल पर, उससे (04:55–06:31) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 7 नवंबर, 07:56–19:21 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 7 नवंबर 01:39 से शुक्र 8 नवंबर 02:49 तक है; हरिवासर 07:56 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:21) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।