Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1995 गुरु 19 अक्टूबर या शुक्र 20 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में रमा एकादशी 1995 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 19 अक्टूबर
वैष्णव
शुक्रवार 20 अक्टूबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 19 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 20 अक्टूबर
वैष्णव · शनिवार 21 अक्टूबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 19 अक्टूबर
-
06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 20 अक्टूबर
-
13:06–19:14पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 20 अक्टूबर
-
06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 21 अक्टूबर
-
06:40–06:59पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में रमा एकादशी गुरु 19 अक्टूबर या शुक्र 20 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी गुरु 19 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 20 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:35 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:35 से 07:09 शुक्र तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:35 गुरु से 07:09 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सुबह सूर्योदय पर है, गुरु 19 अक्टूबर को 06:41 और शुक्र 20 अक्टूबर को 06:40; दो सूर्योदयों पर हो और द्वादशी न बढ़े तो स्मार्त पहले दिन व्रत रखते हैं: गुरु 19 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 19 अक्टूबर को दशमी 06:35 तक है, अरुणोदय (05:05–06:41) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। शुक्र 20 अक्टूबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है: शुक्र 20 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 20 अक्टूबर, 13:06–19:14 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 20 अक्टूबर 07:09 से शनि 21 अक्टूबर 06:59 तक है; हरिवासर 13:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:14) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:11 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 21 अक्टूबर, 06:40–06:59
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 20 अक्टूबर 07:09 से शनि 21 अक्टूबर 06:59 तक है; हरिवासर 13:06 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 21 अक्टूबर को सूर्योदय (06:40) से होता है।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।