Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1983 सोम 31 अक्टूबर या मंगल 1 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में रमा एकादशी 1983 कब है?
स्मार्त
सोमवार 31 अक्टूबर
वैष्णव
मंगलवार 1 नवंबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 31 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 1 नवंबर
वैष्णव · बुधवार 2 नवंबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 31 अक्टूबर
-
05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 1 नवंबर
-
09:43–18:18पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 1 नवंबर
-
05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 2 नवंबर
-
05:33–18:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में रमा एकादशी सोम 31 अक्टूबर या मंगल 1 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी सोम 31 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 1 नवंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:54 से। एकादशी: 06:54 से 04:22 मंगल तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:22 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:54 सोम से 04:22 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 31 अक्टूबर को 06:54 पर, उस सूर्योदय (05:34) के बाद, लगती है और मंगल 1 नवंबर को 04:22 पर, अगले सूर्योदय (05:34 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 31 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 31 अक्टूबर को अरुणोदय (03:58–05:34) में दशमी है। मंगल 1 नवंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:22 तक, फिर द्वादशी): मंगल 1 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 1 नवंबर, 09:43–18:18 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 नवंबर 04:22 से बुध 2 नवंबर 01:49 तक है; हरिवासर 09:43 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:18) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:07 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 2 नवंबर, 05:33–18:19 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 2 नवंबर को 01:49 पर, रात में, अरुणोदय (03:57) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:33) से सूर्यास्त (18:19) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।