Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 1998 पारण समय 06:33–14:23, रवि 1 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 1998 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 1 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 31 अक्टूबर
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06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 1 नवंबर
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06:33–14:23पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 1998 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी शनि 31 अक्टूबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी शनि 31 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:30 शुक्र से 17:16 तक।
एकादशी 17:16 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 31 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:34: शनि 31 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:30 शुक्र पर, उससे (04:58–06:34) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 1 नवंबर, 06:33–14:23
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 31 अक्टूबर 17:16 से रवि 1 नवंबर 14:23 तक है; हरिवासर 22:33 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 1 नवंबर को सूर्योदय (06:33) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:07 तक, करते हैं।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।