Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 1982 पारण समय 03:52–05:06, रवि 28 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 1982 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 28 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 27 नवंबर
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05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 28 नवंबर
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03:52–05:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 1982 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी शनि 27 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी शनि 27 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:08 से। एकादशी: 07:08 से 06:31 शनि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:08 शुक्र से 06:31 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 27 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: शनि 27 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 07:08 शुक्र पर, उससे (03:52–05:28) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 28 नवंबर, 03:52–05:06 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 28 नवंबर को 05:06 पर, अरुणोदय (03:52) लगने के बाद और सूर्योदय (05:28) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।