Pāthardi, महाराष्ट्र में पार्श्व एकादशी 2023 सोम 25 सितंबर या मंगल 26 सितंबर
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में पार्श्व एकादशी 2023 कब है?
स्मार्त
सोमवार 25 सितंबर
वैष्णव
मंगलवार 26 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Pāthardi में सोम 25 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 26 सितंबर
वैष्णव · बुधवार 27 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 25 सितंबर
-
06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 26 सितंबर
-
10:12–18:22पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 26 सितंबर
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06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 27 सितंबर
-
06:18–18:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Pāthardi में पार्श्व एकादशी सोम 25 सितंबर या मंगल 26 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी सोम 25 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 26 सितंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:56 से। एकादशी: 07:56 से 05:01 मंगल तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:01 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:56 सोम से 05:01 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 25 सितंबर को 07:56 पर, उस सूर्योदय (06:18) के बाद, लगती है और मंगल 26 सितंबर को 05:01 पर, अगले सूर्योदय (06:18 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 25 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 25 सितंबर को अरुणोदय (04:42–06:18) में दशमी है। मंगल 26 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:01 तक, फिर द्वादशी): मंगल 26 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 26 सितंबर, 10:12–18:22 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 सितंबर 05:01 से बुध 27 सितंबर 01:46 तक है; हरिवासर 10:12 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:22) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 27 सितंबर, 06:18–18:21 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 27 सितंबर को 01:46 पर, रात में, अरुणोदय (04:42) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:18) से सूर्यास्त (18:21) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।