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Pāthardi, महाराष्ट्र में पार्श्व एकादशी 2022 मंगल 6 सितंबर या बुध 7 सितंबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में पार्श्व एकादशी 2022 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 6 सितंबर

वैष्णव

बुधवार 7 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

Pāthardi में मंगल 6 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 7 सितंबर

पारण समय
08:20–18:39
10 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 8 सितंबर

पारण समय
06:15–18:38
12 घं 23 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 6 सितंबर
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 7 सितंबर
  • 08:20–18:39पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 7 सितंबर
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 8 सितंबर
  • 06:15–18:38पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में पार्श्व एकादशी मंगल 6 सितंबर या बुध 7 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी मंगल 6 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 7 सितंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:54 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:54 से 03:05 बुध तक।

एकादशी 03:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:54 मंगल से 03:05 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 6 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:15: मंगल 6 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 6 सितंबर को दशमी 05:54 तक है, अरुणोदय (04:39–06:15) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:05 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 7 सितंबर को व्रत रखते हैं: बुध 7 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 7 सितंबर, 08:20–18:39 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 7 सितंबर 03:05 से गुरु 8 सितंबर 00:05 तक है; हरिवासर 08:20 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:39) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं।

वैष्णव · गुरु 8 सितंबर, 06:15–18:38 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 8 सितंबर को 00:05 पर, रात में, अरुणोदय (04:39) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:15) से सूर्यास्त (18:38) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।