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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पार्श्व एकादशी 2017 पारण समय 06:29⁠–⁠09:42, रवि 3 सितंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पार्श्व एकादशी 2017 कब है?

शनिवार 2 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 2 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 3 सितंबर

पारण समय
06:29–09:42
3 घं 13 मि

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 2 सितंबर
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 3 सितंबर
  • 06:29–09:42पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पार्श्व एकादशी शनि 2 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी शनि 2 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:06 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:06 से 08:08 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:06 शुक्र से 08:08 तक।

द्वादशी: 08:08 शनि से 09:42 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 1 सितंबर को 06:27 और शनि 2 सितंबर को 06:28। एकादशी (शुक्र 1 सितंबर 06:06 से शनि 2 सितंबर 08:08 तक) और द्वादशी (शनि 2 सितंबर 08:08 से रवि 3 सितंबर 09:42 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 2 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 1 सितंबर को दशमी 06:06 तक है, उसके भीतर (04:51–06:27); शनि 2 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 3 सितंबर, 06:29–09:42

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 2 सितंबर 08:08 से रवि 3 सितंबर 09:42 तक है; हरिवासर 14:31 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 3 सितंबर को सूर्योदय (06:29) से होता है।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।