Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पार्श्व एकादशी 2016 सोम 12 सितंबर या मंगल 13 सितंबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में पार्श्व एकादशी 2016 कब है?
स्मार्त
सोमवार 12 सितंबर
वैष्णव
मंगलवार 13 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Sevan में सोम 12 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 13 सितंबर
वैष्णव · बुधवार 14 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 12 सितंबर
-
06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 13 सितंबर
-
12:13–19:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 13 सितंबर
-
06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 14 सितंबर
-
05:03–05:32पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में पार्श्व एकादशी सोम 12 सितंबर या मंगल 13 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी सोम 12 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 13 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:35 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:35 से 06:26 मंगल तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:26 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:35 सोम से 06:26 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 12 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:37: सोम 12 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 12 सितंबर को दशमी 06:35 तक है, अरुणोदय (05:01–06:37) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:26 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 13 सितंबर को व्रत रखते हैं: मंगल 13 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 13 सितंबर, 12:13–19:11 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 13 सितंबर 06:26 से बुध 14 सितंबर 05:32 तक है; हरिवासर 12:13 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:11) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:09 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 14 सितंबर, 05:03–05:32 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 14 सितंबर को 05:32 पर, अरुणोदय (05:03) लगने के बाद और सूर्योदय (06:39) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।