Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1978 मंगल 12 सितंबर या बुध 13 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पार्श्व एकादशी 1978 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 12 सितंबर
वैष्णव
बुधवार 13 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Ipameri में मंगल 12 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 13 सितंबर
वैष्णव · गुरुवार 14 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 12 सितंबर
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06:11व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 13 सितंबर
-
08:52–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 13 सितंबर
-
06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 14 सितंबर
-
06:09–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पार्श्व एकादशी मंगल 12 सितंबर या बुध 13 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी मंगल 12 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव बुध 13 सितंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:29 से। एकादशी: 06:29 से 03:37 बुध तक।
एकादशी 03:37 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:29 मंगल से 03:37 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह मंगल 12 सितंबर को 06:29 पर, उस सूर्योदय (06:11) के बाद, लगती है और बुध 13 सितंबर को 03:37 पर, अगले सूर्योदय (06:10 बुध) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 12 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 12 सितंबर को अरुणोदय (04:35–06:11) में दशमी है। बुध 13 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:37 तक, फिर द्वादशी): बुध 13 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 13 सितंबर, 08:52–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 13 सितंबर 03:37 से गुरु 14 सितंबर 00:37 तक है; हरिवासर 08:52 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 14 सितंबर, 06:09–18:07 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 14 सितंबर को 00:37 पर, रात में, अरुणोदय (04:33) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:09) से सूर्यास्त (18:07) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।