Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1969 रवि 21 सितंबर या सोम 22 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पार्श्व एकादशी 1969 कब है?
स्मार्त
रविवार 21 सितंबर
वैष्णव
सोमवार 22 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Ipameri में रवि 21 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 22 सितंबर
वैष्णव · मंगलवार 23 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 21 सितंबर
-
06:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 22 सितंबर
-
08:13–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 22 सितंबर
-
06:02व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 23 सितंबर
-
06:01–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पार्श्व एकादशी रवि 21 सितंबर या सोम 22 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी रवि 21 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 22 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:29 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:29 से 02:52 सोम तक।
एकादशी 02:52 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:29 रवि से 02:52 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 21 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:03: रवि 21 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 21 सितंबर को दशमी 05:29 तक है, अरुणोदय (04:27–06:03) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:52 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 22 सितंबर को व्रत रखते हैं: सोम 22 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 22 सितंबर, 08:13–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 22 सितंबर 02:52 से मंगल 23 सितंबर 00:15 तक है; हरिवासर 08:13 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:27 तक, करते हैं।
वैष्णव · मंगल 23 सितंबर, 06:01–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 23 सितंबर को 00:15 पर, रात में, अरुणोदय (04:25) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:01) से सूर्यास्त (18:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।