tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 1983 पारण समय 06:14⁠–⁠09:34, शुक्र 11 मार्च

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 1983 कब है?

गुरुवार 10 मार्च

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 10 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 11 मार्च

पारण समय
06:14–09:34
3 घं 20 मि

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 10 मार्च
  • 06:14व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 11 मार्च
  • 06:14–09:34पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी गुरु 10 मार्च को क्यों है?

परमा एकादशी गुरु 10 मार्च को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:21 से 07:03 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:21 बुध से 07:03 तक।

द्वादशी: 07:03 गुरु से 09:34 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 9 मार्च को 06:14 और गुरु 10 मार्च को 06:14। एकादशी (बुध 9 मार्च 04:21 से गुरु 10 मार्च 07:03 तक) और द्वादशी (गुरु 10 मार्च 07:03 से शुक्र 11 मार्च 09:34 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 10 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 11 मार्च, 06:14–09:34

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 10 मार्च 07:03 से शुक्र 11 मार्च 09:34 तक है; हरिवासर 13:41 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 11 मार्च को सूर्योदय (06:14) से होता है।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।