tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 1982 पारण समय 07:21⁠–⁠18:12, बुध 13 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 1982 कब है?

मंगलवार 12 अक्टूबर

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 12 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 13 अक्टूबर

पारण समय
07:21–18:12
10 घं 51 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 12 अक्टूबर
  • 05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 13 अक्टूबर
  • 07:21–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी मंगल 12 अक्टूबर को क्यों है?

परमा एकादशी मंगल 12 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:33 से 01:46 बुध तक।

एकादशी 01:46 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 12 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:46: मंगल 12 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:33 पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 13 अक्टूबर, 07:21–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 13 अक्टूबर 01:46 से गुरु 14 अक्टूबर 00:08 तक है; हरिवासर 07:21 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।