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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पापांकुशा एकादशी 2015 शुक्र 23 अक्टूबर या शनि 24 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पापांकुशा एकादशी 2015 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 23 अक्टूबर

वैष्णव

शनिवार 24 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

Sevan में शुक्र 23 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 24 अक्टूबर

पारण समय
10:56–18:07
7 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 25 अक्टूबर

पारण समय
07:21–18:06
10 घं 45 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 23 अक्टूबर
  • 07:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 24 अक्टूबर
  • 10:56–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 24 अक्टूबर
  • 07:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 25 अक्टूबर
  • 07:21–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पापांकुशा एकादशी शुक्र 23 अक्टूबर या शनि 24 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी शुक्र 23 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 24 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:21 से। एकादशी: 08:21 से 05:42 शनि तक।

एकादशी 05:42 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 08:21 शुक्र से 05:42 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 23 अक्टूबर को 08:21 पर, उस सूर्योदय (07:19) के बाद, लगती है और शनि 24 अक्टूबर को 05:42 पर, अगले सूर्योदय (07:20 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 23 अक्टूबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 23 अक्टूबर को अरुणोदय (05:43–07:19) में दशमी है। शनि 24 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:42 तक, फिर द्वादशी): शनि 24 अक्टूबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 24 अक्टूबर, 10:56–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 24 अक्टूबर 05:42 से रवि 25 अक्टूबर 02:38 तक है; हरिवासर 10:56 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · रवि 25 अक्टूबर, 07:21–18:06 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 25 अक्टूबर को 02:38 पर, रात में, अरुणोदय (05:45) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:21) से सूर्यास्त (18:06) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।