Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पापांकुशा एकादशी 2014 शनि 4 अक्टूबर या रवि 5 अक्टूबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में पापांकुशा एकादशी 2014 कब है?
स्मार्त
शनिवार 4 अक्टूबर
वैष्णव
रविवार 5 अक्टूबर
आश्विन शुक्ल एकादशी
Sevan में शनि 4 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 5 अक्टूबर
वैष्णव · सोमवार 6 अक्टूबर
पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 4 अक्टूबर
-
06:59व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 5 अक्टूबर
-
08:16–18:36पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 5 अक्टूबर
-
07:00व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 अक्टूबर
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07:01–18:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में पापांकुशा एकादशी शनि 4 अक्टूबर या रवि 5 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी शनि 4 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 5 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:54 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:54 से 03:02 रवि तक।
एकादशी 03:02 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:54 शनि से 03:02 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 4 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:59: शनि 4 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 4 अक्टूबर को दशमी 05:54 तक है, अरुणोदय (05:23–06:59) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:02 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 5 अक्टूबर को व्रत रखते हैं: रवि 5 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 5 अक्टूबर, 08:16–18:36 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 अक्टूबर 03:02 से रवि 5 अक्टूबर 23:57 तक है; हरिवासर 08:16 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:36) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:19 तक, करते हैं।
वैष्णव · सोम 6 अक्टूबर, 07:01–18:34 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 6 अक्टूबर को 23:57 रवि पर, रात में, अरुणोदय (05:25) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:01) से सूर्यास्त (18:34) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।