Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1998 गुरु 1 अक्टूबर या शुक्र 2 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1998 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 1 अक्टूबर
वैष्णव
शुक्रवार 2 अक्टूबर
आश्विन शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 1 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 2 अक्टूबर
वैष्णव · शनिवार 3 अक्टूबर
पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 1 अक्टूबर
-
05:55व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 2 अक्टूबर
-
10:23–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 2 अक्टूबर
-
05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 3 अक्टूबर
-
05:53–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पापांकुशा एकादशी गुरु 1 अक्टूबर या शुक्र 2 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी गुरु 1 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 2 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:15 से। एकादशी: 06:15 से 04:54 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:54 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:15 गुरु से 04:54 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 1 अक्टूबर को 06:15 पर, उस सूर्योदय (05:55) के बाद, लगती है और शुक्र 2 अक्टूबर को 04:54 पर, अगले सूर्योदय (05:54 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 1 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 1 अक्टूबर को अरुणोदय (04:19–05:55) में दशमी है। शुक्र 2 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:54 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 2 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 2 अक्टूबर, 10:23–18:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 2 अक्टूबर 04:54 से शनि 3 अक्टूबर 02:48 तक है; हरिवासर 10:23 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:21 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 3 अक्टूबर, 05:53–18:10 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 3 अक्टूबर को 02:48 पर, रात में, अरुणोदय (04:17) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:53) से सूर्यास्त (18:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।