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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1971 पारण समय 05:55⁠–⁠18:10, शुक्र 1 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1971 कब है?

गुरुवार 30 सितंबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 30 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 1 अक्टूबर

पारण समय
05:55–18:10
12 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 30 सितंबर
  • 05:56व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 1 अक्टूबर
  • 05:55–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी गुरु 30 सितंबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी गुरु 30 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:42 से 22:43 तक।

एकादशी 22:43 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 30 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:56: गुरु 30 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:42 पर, उससे (04:20–05:56) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 1 अक्टूबर, 05:55–18:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 30 सितंबर 22:43 से शुक्र 1 अक्टूबर 20:03 तक है; हरिवासर 04:03 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 1 अक्टूबर को सूर्योदय (05:55) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।