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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1931 पारण समय 07:51⁠–⁠19:15, गुरु 22 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1931 कब है?

बुधवार 21 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 21 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 22 अक्टूबर

पारण समय
07:51–19:15
11 घं 24 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 21 अक्टूबर
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 22 अक्टूबर
  • 07:51–19:15पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी बुध 21 अक्टूबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी बुध 21 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:51 मंगल से 01:12 गुरु तक।

एकादशी 01:12 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 21 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:40: बुध 21 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:51 मंगल पर, उससे (05:04–06:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 22 अक्टूबर, 07:51–19:15 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 22 अक्टूबर 01:12 से शुक्र 23 अक्टूबर 03:48 तक है; हरिवासर 07:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:15) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:11 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।