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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1930 पारण समय 05:52⁠–⁠10:02, शनि 4 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1930 कब है?

शुक्रवार 3 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 3 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 4 अक्टूबर

पारण समय
05:52–10:02
4 घं 10 मि

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 3 अक्टूबर
  • 05:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 4 अक्टूबर
  • 05:52–10:02पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी शुक्र 3 अक्टूबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी शुक्र 3 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:06 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:06 से 07:35 शुक्र तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:06 गुरु से 07:35 तक।

द्वादशी: 07:35 शुक्र से 10:02 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 2 अक्टूबर को 05:54 और शुक्र 3 अक्टूबर को 05:53। एकादशी (गुरु 2 अक्टूबर 05:06 से शुक्र 3 अक्टूबर 07:35 तक) और द्वादशी (शुक्र 3 अक्टूबर 07:35 से शनि 4 अक्टूबर 10:02 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शुक्र 3 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: गुरु 2 अक्टूबर को दशमी 05:06 तक है, उसके भीतर (04:18–05:54); शुक्र 3 अक्टूबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 4 अक्टूबर, 05:52–10:02

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 अक्टूबर 07:35 से शनि 4 अक्टूबर 10:02 तक है; हरिवासर 14:12 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 4 अक्टूबर को सूर्योदय (05:52) से होता है।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।