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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पद्मिनी एकादशी 1920 पारण समय 04:51⁠–⁠19:20, मंगल 27 जुलाई

व्रत · समय UTC+3 में

Sevan में पद्मिनी एकादशी 1920 कब है?

सोमवार 26 जुलाई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में सोम 26 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 27 जुलाई

पारण समय
04:51–19:20
14 घं 29 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 26 जुलाई
  • 04:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 27 जुलाई
  • 04:51–19:20पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पद्मिनी एकादशी सोम 26 जुलाई को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी सोम 26 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:55 रवि से 17:24 तक।

एकादशी 17:24 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 26 जुलाई को सूर्योदय पर है, 04:48: सोम 26 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:55 रवि पर, उससे (03:12–04:48) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 27 जुलाई, 04:51–19:20 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 26 जुलाई 17:24 से मंगल 27 जुलाई 19:54 तक है; हरिवासर 00:01 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 27 जुलाई को सूर्योदय (04:49) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:18) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:43 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।