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Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 2027 पारण समय 08:14⁠–⁠19:08, मंगल 15 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में निर्जला एकादशी 2027 कब है?

सोमवार 14 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में सोम 14 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 15 जून

पारण समय
08:14–19:08
10 घं 54 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 14 जून
  • 05:51व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 15 जून
  • 08:14–19:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में निर्जला एकादशी सोम 14 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी सोम 14 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:12 से 02:08 मंगल तक।

एकादशी 02:08 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:12 सोम से 02:08 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 14 जून को सूर्योदय पर है, 05:51: सोम 14 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:12 पर, उससे (04:15–05:51) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 15 जून, 08:14–19:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 15 जून 02:08 से बुध 16 जून 02:31 तक है; हरिवासर 08:14 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।