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Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 2026 पारण समय 05:53⁠–⁠19:10, शुक्र 26 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में निर्जला एकादशी 2026 कब है?

गुरुवार 25 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 25 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 26 जून

पारण समय
05:53–19:10
13 घं 17 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 25 जून
  • 05:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 26 जून
  • 05:53–19:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में निर्जला एकादशी गुरु 25 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी गुरु 25 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:12 बुध से 20:09 तक।

एकादशी 20:09 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 जून को सूर्योदय पर है, 05:53: गुरु 25 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:12 बुध पर, उससे (04:17–05:53) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 26 जून, 05:53–19:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 25 जून 20:09 से शुक्र 26 जून 22:22 तक है; हरिवासर 02:43 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 26 जून को सूर्योदय (05:53) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:32 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।