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Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 2025 पारण समय 11:26⁠–⁠19:05, शनि 7 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में निर्जला एकादशी 2025 कब है?

शुक्रवार 6 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में शुक्र 6 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 7 जून

पारण समय
11:26–19:05
7 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 6 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 7 जून
  • 11:26–19:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में निर्जला एकादशी शुक्र 6 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी शुक्र 6 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:16 से 04:48 शनि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 04:48 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 02:16 शुक्र से 04:48 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 6 जून को सूर्योदय पर है, 05:50: शुक्र 6 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:16 पर, उससे (04:14–05:50) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 7 जून, 11:26–19:05 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 7 जून 04:48 से रवि 8 जून 07:18 तक है; हरिवासर 11:26 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:05) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।