Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2083 शुक्र 25 जून या शनि 26 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में निर्जला एकादशी 2083 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 25 जून
वैष्णव
शनिवार 26 जून
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Ipameri में शुक्र 25 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 26 जून
वैष्णव · रविवार 27 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 25 जून
-
06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 26 जून
-
08:50–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 26 जून
-
06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 27 जून
-
06:43–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में निर्जला एकादशी शुक्र 25 जून या शनि 26 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी शुक्र 25 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 26 जून को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:38 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:38 से 03:40 शनि तक।
एकादशी 03:40 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:38 शुक्र से 03:40 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 25 जून को सूर्योदय पर है, 06:43: शुक्र 25 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 25 जून को दशमी 06:38 तक है, अरुणोदय (05:07–06:43) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:40 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 26 जून को व्रत रखते हैं: शनि 26 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 26 जून, 08:50–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 26 जून 03:40 से रवि 27 जून 00:21 तक है; हरिवासर 08:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:56 तक, करते हैं।
वैष्णव · रवि 27 जून, 06:43–17:48 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 27 जून को 00:21 पर, रात में, अरुणोदय (05:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:43) से सूर्यास्त (17:48) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।