Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2082 शनि 6 जून या रवि 7 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में निर्जला एकादशी 2082 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 7 जून
वैष्णव · सोमवार 8 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 6 जून
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06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 7 जून
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07:46–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 7 जून
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06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 8 जून
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06:39–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में निर्जला एकादशी शनि 6 जून या रवि 7 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी शनि 6 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 7 जून को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:19 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:19 से 02:30 रवि तक।
एकादशी 02:30 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 6 जून को सूर्योदय पर है, 06:38: शनि 6 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 6 जून को दशमी 05:19 तक है, अरुणोदय (05:02–06:38) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:30 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 7 जून को व्रत रखते हैं: रवि 7 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 7 जून, 07:46–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 7 जून 02:30 से रवि 7 जून 23:32 तक है; हरिवासर 07:46 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:52 तक, करते हैं।
वैष्णव · सोम 8 जून, 06:39–17:44 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 8 जून को 23:32 रवि पर, रात में, अरुणोदय (05:03) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:39) से सूर्यास्त (17:44) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।