Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2040 बुध 20 जून या गुरु 21 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में निर्जला एकादशी 2040 कब है?
स्मार्त
बुधवार 20 जून
वैष्णव
गुरुवार 21 जून
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Ipameri में बुध 20 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 21 जून
वैष्णव · शुक्रवार 22 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 20 जून
-
06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 21 जून
-
09:51–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 21 जून
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06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 22 जून
-
06:42–17:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में निर्जला एकादशी बुध 20 जून या गुरु 21 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी बुध 20 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 21 जून को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:58 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:58 से 04:25 गुरु तक।
एकादशी 04:25 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:58 बुध से 04:25 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 20 जून को सूर्योदय पर है, 06:42: बुध 20 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 20 जून को दशमी 05:58 तक है, अरुणोदय (05:06–06:42) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:25 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 21 जून को व्रत रखते हैं: गुरु 21 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 21 जून, 09:51–17:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 21 जून 04:25 से शुक्र 22 जून 02:09 तक है; हरिवासर 09:51 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:55 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 22 जून, 06:42–17:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 22 जून को 02:09 पर, रात में, अरुणोदय (05:06) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:42) से सूर्यास्त (17:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।