Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2039 गुरु 2 जून या शुक्र 3 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में निर्जला एकादशी 2039 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 2 जून
वैष्णव
शुक्रवार 3 जून
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 2 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 3 जून
वैष्णव · शनिवार 4 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 2 जून
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06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 3 जून
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10:58–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 3 जून
-
06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 4 जून
-
06:37–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में निर्जला एकादशी गुरु 2 जून या शुक्र 3 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी गुरु 2 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 3 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:12 से। एकादशी: 08:12 से 05:43 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:43 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:12 गुरु से 05:43 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 2 जून को 08:12 पर, उस सूर्योदय (06:36) के बाद, लगती है और शुक्र 3 जून को 05:43 पर, अगले सूर्योदय (06:37 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 2 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 2 जून को अरुणोदय (05:00–06:36) में दशमी है। शुक्र 3 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:43 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 3 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 3 जून, 10:58–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 जून 05:43 से शनि 4 जून 02:41 तक है; हरिवासर 10:58 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:50 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 4 जून, 06:37–17:44 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 4 जून को 02:41 पर, रात में, अरुणोदय (05:01) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:37) से सूर्यास्त (17:44) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।