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Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 2031 रवि 1 जून या सोम 2 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में निर्जला एकादशी 2031 कब है?

स्मार्त

रविवार 1 जून

वैष्णव

सोमवार 2 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

Pāthardi में रवि 1 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 2 जून

पारण समय
09:45–19:03
9 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 3 जून

पारण समय
05:50–19:04
13 घं 14 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 1 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 2 जून
  • 09:45–19:03पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 2 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 3 जून
  • 05:50–19:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में निर्जला एकादशी रवि 1 जून या सोम 2 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी रवि 1 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 2 जून को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:21 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:21 से 04:13 सोम तक।

एकादशी 04:13 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:21 रवि से 04:13 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 1 जून को सूर्योदय पर है, 05:50: रवि 1 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 1 जून को दशमी 05:21 तक है, अरुणोदय (04:14–05:50) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:13 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 2 जून को व्रत रखते हैं: सोम 2 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 2 जून, 09:45–19:03 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 2 जून 04:13 से मंगल 3 जून 02:21 तक है; हरिवासर 09:45 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:03) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · मंगल 3 जून, 05:50–19:04 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 3 जून को 02:21 पर, रात में, अरुणोदय (04:14) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:50) से सूर्यास्त (19:04) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।