Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 1920 गुरु 27 मई या शुक्र 28 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में निर्जला एकादशी 1920 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 27 मई
वैष्णव
शुक्रवार 28 मई
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 27 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 28 मई
वैष्णव · शनिवार 29 मई
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 27 मई
-
06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 28 मई
-
12:54–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 28 मई
-
06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 29 मई
-
06:35–07:58पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में निर्जला एकादशी गुरु 27 मई या शुक्र 28 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी गुरु 27 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 28 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:38 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:38 से 06:33 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:33 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:38 गुरु से 06:33 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 27 मई को सूर्योदय पर है, 06:34: गुरु 27 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 27 मई को दशमी 05:38 तक है, अरुणोदय (04:58–06:34) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:33 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 28 मई को व्रत रखते हैं: शुक्र 28 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 28 मई, 12:54–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 28 मई 06:33 से शनि 29 मई 07:58 तक है; हरिवासर 12:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:48 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 29 मई, 06:35–07:58
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 28 मई 06:33 से शनि 29 मई 07:58 तक है; हरिवासर 12:54 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 29 मई को सूर्योदय (06:35) से होता है।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।