tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 1919 पारण समय 10:39⁠–⁠17:44, सोम 9 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 1919 कब है?

रविवार 8 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 8 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 9 जून

पारण समय
10:39–17:44
7 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 8 जून
  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 9 जून
  • 10:39–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी रवि 8 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी रवि 8 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:35 से 04:01 सोम तक।

एकादशी 04:01 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:35 रवि से 04:01 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 8 जून को सूर्योदय पर है, 06:38: रवि 8 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:35 पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 9 जून, 10:39–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 9 जून 04:01 से मंगल 10 जून 06:35 तक है; हरिवासर 10:39 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:51 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।