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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में कामदा एकादशी 2024 पारण समय 06:13⁠–⁠19:44, शनि 20 अप्रैल

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में कामदा एकादशी 2024 कब है?

शुक्रवार 19 अप्रैल

चैत्र शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 19 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 20 अप्रैल

पारण समय
06:13–19:44
13 घं 31 मि · Tithika की परिपाटी

कामदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 19 अप्रैल
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 20 अप्रैल
  • 06:13–19:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंकामदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में कामदा एकादशी शुक्र 19 अप्रैल को क्यों है?

कामदा एकादशी शुक्र 19 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:02 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:02 गुरु से 18:35 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 19 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:15: शुक्र 19 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:02 गुरु पर, उससे (04:39–06:15) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 20 अप्रैल, 06:13–19:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 19 अप्रैल 18:35 से शनि 20 अप्रैल 21:12 तक है; हरिवासर 01:14 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 20 अप्रैल को सूर्योदय (06:13) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:55 तक, करते हैं।

नियम

चैत्र शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।