tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1996 पारण समय 10:56⁠–⁠19:52, बुध 31 जनवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 1996 कब है?

मंगलवार 30 जनवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 30 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 31 जनवरी

पारण समय
10:56–19:52
8 घं 56 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 30 जनवरी
  • 06:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 31 जनवरी
  • 10:56–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी मंगल 30 जनवरी को क्यों है?

जया एकादशी मंगल 30 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:48 से 04:17 बुध तक।

एकादशी 04:17 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:48 मंगल से 04:17 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 30 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:58: मंगल 30 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:48 पर, उससे (05:22–06:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 31 जनवरी, 10:56–19:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 31 जनवरी 04:17 से गुरु 1 फ़रवरी 06:52 तक है; हरिवासर 10:56 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:34 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।