tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1995 पारण समय 07:05⁠–⁠09:09, रवि 12 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 1995 कब है?

शनिवार 11 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 11 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 12 फ़रवरी

पारण समय
07:05–09:09
2 घं 4 मि

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 11 फ़रवरी
  • 07:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 12 फ़रवरी
  • 07:05–09:09पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी शनि 11 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी शनि 11 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:27 से 07:35 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:27 शुक्र से 07:35 तक।

द्वादशी: 07:35 शनि से 09:09 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 10 फ़रवरी को 07:04 और शनि 11 फ़रवरी को 07:05। एकादशी (शुक्र 10 फ़रवरी 05:27 से शनि 11 फ़रवरी 07:35 तक) और द्वादशी (शनि 11 फ़रवरी 07:35 से रवि 12 फ़रवरी 09:09 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 11 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 12 फ़रवरी, 07:05–09:09

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 11 फ़रवरी 07:35 से रवि 12 फ़रवरी 09:09 तक है; हरिवासर 13:58 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 12 फ़रवरी को सूर्योदय (07:05) से होता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।