tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1945 मंगल 23 जनवरी या बुध 24 जनवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 1945 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 23 जनवरी

वैष्णव

बुधवार 24 जनवरी

माघ शुक्ल एकादशी

Ipameri में मंगल 23 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 24 जनवरी

पारण समय
09:36–18:54
9 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 25 जनवरी

पारण समय
05:56–18:54
12 घं 58 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 23 जनवरी
  • 05:55व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 24 जनवरी
  • 09:36–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 24 जनवरी
  • 05:55व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 25 जनवरी
  • 05:56–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी मंगल 23 जनवरी या बुध 24 जनवरी को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में जया एकादशी मंगल 23 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 24 जनवरी को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:46 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:46 से 03:46 बुध तक।

एकादशी 03:46 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:46 मंगल से 03:46 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 23 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:55: मंगल 23 जनवरी।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 23 जनवरी को दशमी 04:46 तक है, अरुणोदय (04:19–05:55) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:46 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 24 जनवरी को व्रत रखते हैं: बुध 24 जनवरी।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 24 जनवरी, 09:36–18:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 24 जनवरी 03:46 से गुरु 25 जनवरी 03:08 तक है; हरिवासर 09:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 25 जनवरी, 05:56–18:54 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 25 जनवरी को 03:08 पर, रात में, अरुणोदय (04:20) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:56) से सूर्यास्त (18:54) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।